उपहार सिनेमा कांड पर बनी वेब सीरीज के मामले में फैसला सुरक्षित रखा

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उपहार अग्निकांड पर बनी वेब सीरिज ट्रायल बाई फायर पर रोक लगाने की मांग को लेकर रियल एस्टेट कारोबारी अंसल बंधु की याचिका पर उच्च न्यायालय ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा.

इससे पहले अंसल बंधुओं ने कहा कि यह वेब सीरीज सीधे तौर पर उनके व्यक्तित्व पर हमला है. 1997 के उपहार अग्निकांड मामले में अंसल बंधु और अन्य दोषी हैं और अपनी सजा पूरी कर चुके हैं. वहीं, मामले दस्तावेजों से छेड़छाड़ के मामले में भी अंसल बंधु और अन्य दोषी पाए गए थे.

नेटफ्लिक्स पर 13 जनवरी को रिलीज होने वाली वेब सीरिज उपहार अग्निकांड पर आधारित बताई जाती है. जस्टिस यशवंत वर्मा ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस वेब सीरिज पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. उन्होंने इस वेब सीरिज पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि इसके टीजर को चार दिन के भीतर 15 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है.

अंसल के वकील ने कोर्ट से कहा कि ये एकमात्र संकेत है कि फिल्म में क्या देखा जाएगा. वकील ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करने वाली किताब का पैराग्राफ पढ़कर सुनाया. जस्टिस वर्मा ने कहा कि हमें टीज़र दिखाओ. फैसले की आलोचना माता-पिता की पीड़ा का परिणाम हो सकती है. इसका आपके मानहानि के दावे से कोई लेना-देना नहीं है. क्या यह (फिल्म) गलत है, कलात्मक लाइसेंस से परे है, हमें देखना होगा.

सुशील असंल के वकील ने कोर्ट से कहा कि फिल्म के चरित्र (सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार नहीं) तत्काल पूर्वाग्रहपूर्ण हैं. ये एक ऐसी स्थिति है जहां वे मुझे नाम (असंल) से बुलाते हैं. इसका सीधा असर मेरी प्रतिष्ठा पर पड़ता है. यह पता लगाने का एकमात्र तरीका है कि मेरे डर निराधार हैं या नहीं, यह देखने के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग है. दोनों, टीज़र, ट्रेलर, और किताब, स्पष्ट रूप से इंगित करते हैं कि ये फिल्म इस बारे में है कि मैं कैसे एक सामूहिक हत्यारा हूं और न कि मैं किसका दोषी पाया गया हूं.

नेटफ्लिक्स के वकील राजीव नायर ने कहा कि किताब के बयानों के आधार पर रोक मांगी गई है. आरोप किताब पर आधारित हैं, क्या हम अनुमान लगा सकते हैं कि फिल्म कैसी होगी? क्या हम मेरे द्वारा लिए गए डिस्क्लेमर के आलोक में अनुमान लगा सकते हैं? राजीव नायर ने चार फैसलों का हवाला दिया, जहां केवल ट्रेलर और प्रोमो के आधार पर कोई निषेधाज्ञा नहीं दी गई थी.

कोर्ट ने कहा कि पब्लिक डोमेन में समालोचना भी उस तरीके से होगी जिस तरह से पूरा घटनाक्रम और ट्रायल चला. नेटफ्लिक्स के वकील अमित सिब्बल ने कहा कि ये साफ तौर पर जनहित का मामला है. सार्वजनिक रूप से घोषणा की गई थी कि एक वेब सीरीज बनाई जाएगी और घोषणा से तीन साल पहले पुस्तक प्रकाशित हुई थी. वादी किताब के खिलाफ कोर्ट नहीं आया. उन्होंने वेब सीरीज बनने का इंतजार किया.

जस्टिस वर्माने पूछा कि क्या वो किताब मामले के ट्रायल के दौरान प्रकाशित हुई थी? इस पर अमित सिब्बल ने कह, “हां, उपहार कांड में दो समानांतर कार्यवाही हुई हैं. एक लापरवाही से मौत का कारण बन रहा था. जो अंतिम रूप ले चुका हो.दूसरा मामला सबूत के साथ छेड़छाड़ करने का. किताब का विषय त्रासदी है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह पीड़ितों के नजरिए से है.”

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