प्रयागराज माघ मेला को डिजिटल स्वरूप देने की तैयारी

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प्रयागराज (Prayagraj) के तट पर लगने जा रहे आस्था और संस्कृति के सबसे बड़े समागम माघ मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. लगभग 6 जनवरी से दो महीने तक चलने वाले इस आयोजन को योगी सरकार इस बार महाकुम्भ 2025 का रिहर्सल मानकर चल रही है. ऐसे में शासन की मंशा इसे मिनी कुम्भ (Mini Kumbh Mela) के रूप में आयोजित करने की है. इसलिए माघ मेला व्यवस्था और आयोजन के नजरिये से विशेष होने जा रहा है.

संगम तट पर लगने जा रहे माघ मेले को दिव्य और भव्य बनाने की प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप ही माघ मेला प्रशासन इसे बसाने की कोशिश कर रहा है. माघ मेला अधिकारी अरविन्द चौहान ने बताया, इस बार कुल 700 हेक्टेयर में माघ मेला बसाया जाएगा, जिसमें व्यवस्था के लिए 6 सेक्टर बनाये गए हैं. हर सेक्टर में एक सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती होगी. संत महात्माओं और कल्पवासियों को सुविधाओं के लिए इस बार मेला प्रशासन के अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़े. इसलिए पहली बार सुविधाओं को हर सेक्टर में ही वितरित किया जाएगा.

संत-महात्माओं, कल्पवासियों के लिए पहली बार बनेंगे सुविधा केंद्र

माघ मेला महाकुम्भ-2025 का लिटमस टेस्ट होगा. इसके लिए कई नए प्रयोग भी इसमें किये जा रहे हैं. पहली बार माघ मेला क्षेत्र में 10 सुविधा केंद्र बनाये जाएंगे. एक तरह से यह माघ मेला के रिसेप्शन सेंटर होंगे. जिनमें मेला में बाहर से आने वाले संत-महात्माओं और कल्पवासियों को मेले की व्यवस्था से जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध कराई जायेगी. इसमें मेला प्रशासन की तरफ से एक कर्मचारी की नियुक्ति होगी. जो चौबीस घंटे यहाँ आने वाले श्रधालुओं को जानकारी देगा. पहली बार मेला क्षेत्र में बाहर से स्नान पर्वों में संगम स्नान के लिए आने वाले दूर दराज के श्रधालुओ के ठहरने के लिए 500 बेड का एक विश्रामालय भी बनाया जाएगा. जिसमे उनके ठहरने की सभी बुनियादी सुविधाएं होंगी .

स्वास्थ्य विभाग की ओर से माघ मेला में तैनात किए गए डा. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि पूरे माघ मेला क्षेत्र में 44000 से ज्यादा टायलेट और 4000 यूरिनल की व्यवस्था की जा रही है. हर सेक्टर में इसके प्रबंध होंगे. संगम के आसपास मोबाइल टायलेट के इंतजाम किए जाएंगे.

एसटीपी भी बनेगा, जल शोधित होगा : मेला क्षेत्र से निकलने वाले सीवरेज के शोधन के लिए सेक्टर पांच के बाहरी क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी स्थापित किया जाएगा. इस एसटीपी से शोधित जल ही बाहर जा सकेगा. पहले सीवेज बालू में ही पड़ा रहता था, जिससे गंदगी फैलती थी.

प्लास्टिक मुक्त एवं ओडीएफ होगा माघ मेला

मुख्यमंत्री के आवाहन पर माघ मेला को प्रशासन महाकुम्भ 2025 के रिहर्सल के रूप में ग्रीन कुम्भ के रूप में आयोजित करना है. माघ मेला को भी ग्रीन माघ मेला के रूप में आयोजित किया जा रहा है. मेला प्रशासन ने इसके लिए संपूर्ण माघ मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त करने की तैयारी शुरू कर दी है. माघ मेला क्षेत्र पूरी तरह खुले में शौच मुक्त रहेगा. इसके लिए युद्ध स्तर पर प्रशासन के प्रयास चल रहे हैं. माघ मेला अधिकारी अरविन्द चौहान ने बताया, मेला क्षेत्र में पब्लिक टॉयलेट्स के साथ बायो टॉयलेट्स भी लगाने की योजना है. मेले में जन शौचालय, जीरो डिस्चार्ज शौचालय, मोबाइल टायलेट, वाटरलेस यूरिनल भी बनाने की योजना है.

आड़े नहीं आएगी बजट की कमी

मांग मेले की व्यवस्था में करीब 81 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. मेले को भव्य बनाने के लिए ही पिछले वर्ष की तुलना में करीब सवा गुना ज्यादा खर्च होने का अनुमान है. मेला अधिकारी अरविंद चौहान कहते हैं कि प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर 81 करोड़ की मांग की गई थी. शासन ने इसके लिए धन अवमुक्त करना शुरू कर दिया है . मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वैसे पहले ही इस बात को लेकर सार्वजनिक मंच से आश्वासन दे चुके है कि माघ मेला भव्य और दिव्य हो इसके लिए बजट की कमी नहीं आयेगी .

माघ मेले का सामने आएगा डिजिटल स्वरूप

प्रशासन माघ मेले में कई प्रयोग करने जा रहा है. जिसमे माघ मेले को डिजिटल स्वरूप देना. भीड़ के प्रबंधन के लिए तकनीकी के नए प्रयोग शामिल हैं. संत-महात्माओं और कल्पवासियों को ऑनलाइन सुविधाओं के वितरण की व्यवस्था भी की जा रही है. इसके अलावा ड्रोन के जरिये संपूर्ण मेला क्षेत्र की निगरानी भी की जायेगी. ड्रोन के माध्यम से मेले में स्नान पर्वों पर आने वाली भीड़ का भीड़-प्रबंधन भी होगा . कल्पवासियों के लिए एक ऑनलाइन हेल्प लाइन शुरू करने का मेला प्रशासन का विचार है.

ड्रोन आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस से होगी सुरक्षा

माघ मेले को सरकार जहाँ मिनी महाकुम्भ के रूप में पेश करना चाहती है. तो वहीं 350 लाख के आसपास श्रद्धालु इस बार माघ मेले में आने की संभावना की वजह से सुरक्षा बड़ी चुनौती होगी. माघ मेला प्रशासन जहाँ इस बार 700 हेक्टेयर में फैले सम्पूर्ण मेला क्षेत्र की निगहबानी ड्रोन के जरिये करा रहा है. पहली बार आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने पर विचार चल रहा है. माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था त्रि- स्तरीय होगी. माघ मेला पुलिस प्रभारी आदित्य कुमार शुक्ला के मुताबिक़ इस बार माघ मेला में 3 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किये जाएंगे. मेला क्षेत्र में 14 पुलिस स्टेशन और 38 पुलिस चौकी बनाई जायेंगी. हर थाने के अन्दर ही फायर स्टेशन भी बनाया जाएगा. सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जायेंगे. जिसका नियंत्रण आईसीसीसी से होगा .

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