रायपुर: लेंसकार्ट शोरूम में कर्मचारियों को लगाया तिलक

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रायपुर । रायपुर के लेंसकार्ट शोरूम में घुसकर एक कथित धार्मिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को टीका लगाया। कार्यकर्ताओं ने पहले तो स्टाफ का नाम पूछा और फिर कहा कि वे तिलक लगाकर काम करें। लोगों को बताएं कि वे हिंदू हैं।

इसके बाद महिला ने अपना चश्मा दिखाते हुए कहा कि वह भी इसी कंपनी का चश्मा पहनती हैं, लेकिन अब इसे तोड़कर फेंक रही हैं। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

अब जानिए पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, धर्म जागरण समिति से जुड़े कार्यकर्ता लेंसकार्ट शोरूम पहुंचे और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। कर्मचारियों के नाम पूछने के बाद उन्हें टीका लगाया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर कोई कंपनी हिंदू विरोधी गतिविधि करेगी, तो उसका विरोध किया जाएगा।

संगठन की सह संयोजिका भारती वैष्णव ने सोशल मीडिया पर वायरल डॉक्यूमेंट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कंपनी में कर्मचारियों को तिलक, कलावा या जनेऊ पहनने से रोका जाता है, जबकि मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने की अनुमति दी जाती है। इसी बात को लेकर उन्होंने विरोध जताया।

महिला ने शोरूम में स्टाफ से क्या-क्या कहा ?

वीडियो में महिला कहती हुई नजर आती है कि अभी आप लोग सोच के देखो कि अगर मुस्लिम भाई या क्रिश्चियन बहन आती है और वो अपने धर्म का पालन करती हैं, तो आप लोग रोकोगे उसको। बल्कि सपोर्ट दोगे उसको।

अगर आप लोगों के साथ ये हो रहा है तो आपको लोगों का क्या दायित्व बनता है। आप तिलक लगाकर बैठा कीजिए। आप लोगों को बताइए कि आप हिंदू हैं। बताना, दिखाना ये फैशन नहीं है। बल्कि आपको अभिमान होना चाहिए।

मैं इस शॉप से करीब 3 चश्मे बनवाई हूं और करीब 25 लोगों को इस शॉप के बारे में बताया है। लेकिन इसके मालिक ने हिंदू धर्म के खिलाफ जो काम किया है, उसके बाद मैं लेंसकार्ट का बॉयकाट करती ​हूं।

कंपनी ने दी सफाई, खेद भी जताया

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा कि उसने लोगों की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया है और अब अपने इन-स्टोर स्टाइल गाइड को स्पष्ट और पारदर्शी बनाया है।

कंपनी के मुताबिक, नई गाइडलाइंस में सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों जैसे तिलक, बिंदी, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी को मान्यता दी गई है। कंपनी ने कहा कि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे इसका खेद है। साथ ही भरोसा दिलाया कि आगे की नीतियां समानता और सम्मान के आधार पर बनाई जाएंगी।

विवाद की वजह, वायरल हुआ पुराना डॉक्यूमेंट

यह पूरा विवाद इस हफ्ते की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब लेंसकार्ट की ‘एम्प्लॉई ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक डॉक्यूमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जिसमें कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोका गया था। इसके बाद इंटरनेट पर कंपनी के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी।

फाउंडर पीयूष बंसल ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने दखल देते हुए स्पष्ट किया कि वायरल हुआ डॉक्यूमेंट एक पुराना था और यह कंपनी के वर्तमान रुख को नहीं दर्शाता।

बंसल ने कहा कि हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति के किसी भी रूप पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने इस भ्रम की स्थिति के लिए माफी भी मांगी है।

लेंसकार्ट बोला- हम भारतीयों के लिए बने हैं

कंपनी ने अपने नए बयान में कहा कि लेंसकार्ट भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना है। 2,400 से ज्यादा स्टोर्स ऐसे लोगों द्वारा चलाए जाते हैं, जो अपनी परंपराओं को साथ लेकर आते हैं।

कंपनी ने वादा किया है कि भविष्य की हर ट्रेनिंग और पॉलिसी में सभी की वैल्यूज का ध्यान रखा जाएगा।

क्या होती है ग्रूमिंग पॉलिसी?

कॉर्पोरेट जगत में कंपनियां अपने कर्मचारियों के ड्रेस कोड और व्यवहार के लिए कुछ नियम बनाती हैं, जिसे ग्रूमिंग पॉलिसी कहा जाता है। इसका उद्देश्य ब्रांड की एक समान पहचान बनाना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य माना जाता है।

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