समलैंगिक विवाह के विरोध में अल्पसंख्यक भी उतरे

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कुछ अल्पसंख्यक समूहों ने मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर समलैंगिक विवाह का विरोध जताने के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला दिया है. इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई कर रहा है.

‘कम्युनियन ऑफ चर्च इन इंडिया’ ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं. केंद्र ने भी उच्चतम न्यायालय में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा है कि यह ‘पर्सनल लॉ’ और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को तहस-नहस करने के साथ पूर्ण विनाश का कारण बनेगा. चिश्ती फाउंडेशन, अजमेर के सैयद सलमान चिश्ती ने मुख्य न्यायाधीश को अपनी ‘चिंताओं और आपत्तियों’ से अवगत कराया है. इसमें दावा किया गया है कि समलैंगिक विवाह के लिए कोई भी कानूनी मान्यता भारत के धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों के प्रतिकूल होगी एवं ‘पर्सनल लॉ’ और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को प्रभावित करेगी.

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