जयपुर . राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में सोमवार सुबह वायुसेना का मिग-21 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. मिग-21 मकान के ऊपर गिरा, जिसमें तीन महिलाओं की मौत हो गई. वहीं, पायलट के अलावा तीन अन्य लोग घायल हो गए.
वायुसेना के मुताबिक, विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था. हादसे से पहले पायलट पैराशूट के जरिये सुरक्षित रूप से कूद गया. पायलट का सैन्य अस्पताल में इलाज चल रहा है. रक्षा मंत्रालय ने कहा, विमान ने सूरतगढ़ वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरी थी. पायलट सूरतगढ़ बेस से करीब 25 किलोमीटर दूर बहलोलनगर में मिला.
जांच के आदेश विमान बहलोलनगर गांव के बाहरी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ. वायुसेना ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया है.
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुँच गए. वे प्रशासन ने मुआवजे की माँग कर रहे हैं. इसके लिए लिखित आश्वासन चाहते हैं. परिजनों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे शव नहीं उठाने देंगे.
गौरतलब है कि मिग-21 विमान के क्रैश होने की यह कोई पहली घटना नहीं है. 60 के दशक में यह विमान वायुसेना में शामिल हुआ था. 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध में इस जेट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. लेकिन सेना के बेड़े में शामिल होने के बाद से यह विमान 400 से अधिक बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है. इन हादसों में 200 से ज्यादा पायलट और करीब 60 नागरिकों की मौत हो चुकी है. 2019 में तत्कालीन एयरचीफ मार्शल बी एस धनोआ ने भारतीय वायु सेना के पुराने पड़ चुके फाइटर जेट्स और हथियारों पर बात करते हुए कहा था कि वायुसेना 40 साल से भी ज्यादा पुराने फाइटर जेट्स उड़ा रही है. इतनी पुरानी तो कोई कार भी नहीं चलाता है.
मकान पूरी तरह ध्वस्त विमान रत्ती राम नामक शख्स के मकान पर गिरा, जिसमें उनकी पत्नी की भी मौत हो गई. मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है और पास के घर को भी नुकसान पहुंचा है. चश्मदीद ने बताया कि उसने तेज आवाज सुनी और पैराशूट नीचे आते देखा. चंद सेकंड में ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद घर में रखी लकड़ियों में आग लग गई. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना पर दुख जताया. वहीं, पीड़ितों के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और 50 लाख रुपये मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है.
