सेना में जानवरों की जगह अब रोबोटिक उपकरणों के प्रयोग होंगे

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सेना में सामान परिवहन के लिए जानवरों के इस्तेमाल को कम करने की कवायद शुरू हो गई है. इसके लिए अब अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके तहत सेना ऊंट, घोड़े, खच्चर की जगह अब रोबोटिक उपकरणों का प्रयोग करेगी.

हाल में सेना ने 100 रोबोटिक खच्चरों की खरीद प्रक्रिया शुरू की है. इससे पूर्व 363 लॉजिस्टिक ड्रोन खरीद प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके लिए भविष्य में सेना की एनिमल यूनिट जिसे रिमाउट वेटेनरी कॉर्प्स के रूप में जाना जाता है, उसका आकार छोटा किया जाएगा. हाल में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने भी इसके संकेत दिए थे. सेना में सामान ले जाने के लिए जानवरों का प्रयोग करीब 250 वर्ष पुराना है. यह कार्य 1779 में स्थापित रिमांउट वेनेटरी कार्प्स द्वारा किया जाता है. अब तक पांच हजार खच्चर और 1500 से अधिक घोड़े शानदार सेवाओं के लिए सेना दिवस पर पुरस्कृत भी हो चुके हैं.

यह होगी इनकी खासियत

सेना ने कहा है कि चार टांग वाले रोबोटिक खच्चर ऐसे होने चाहिए, जो प्री-प्रोग्रामिंग के जरिए गंतव्य तक पहुंच सकें. ये खच्चर कम से कम 10 किग्रा वजन ले जाने में समक्ष होने चाहिए. ये तीन हजार मीटर तक की ऊंचाई पर चढ़ सकेंगे. रोबोटिक खच्चर शून्य से 20 डिग्री नीचे और 45 डिग्री तापमान में कार्य करने में सक्षम होने चाहिए.

चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे

सूत्रों के अनुसार पहले चरण में सेना 100 रोबोटिक खच्चरों को अलग-अलग सीमाओं पर आजमाना चाहती है तथा इसके बाद उनकी संख्या बढ़ाएगी. सेना ने सामान ले जाने वाले ड्रोन की खरीद भी शुरू की है. ये ड्रोन 20 किलोग्राम समान ले जाने की क्षमता शामिल होगी. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ये काफी कारगार होंगे.

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