नूपुर शर्मा पर टिप्पणी के खिलाफ पूर्व जजों ने CJI को लिखा खत, कहा- वापस लें कमेंट

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दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) पर की गई टिप्पणी पर लोग सवाल उठा रहे हैं. कई सेवानिवृत्त अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ हाई कोर्ट के 15 पूर्व जजों ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक पत्र लिखा है और कहा है कि नूपुर शर्मा ने लक्ष्मण रेखा नहीं पार की है.

न्यायपालिका के इतिहास में, दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियों का कोई तुलना नहीं है. सबसे बड़े लोकतंत्र की न्याय प्रणाली पर अमिट निशान हैं. सुप्रीम कोर्ट को अपने बयान में तत्काल सुधार करना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक मूल्यों और देश की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं.

क्या है हस्ताक्षरकर्ताओं की अपील?

सभी हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से टिप्पणी वापस लेने की अपील की है. सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के बयानों को कई जगहों पर भड़की हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था. हस्ताक्षर करने वालों में बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश क्षितिज व्यास, गुवाहाटी हाई कोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के श्रीधर राव, दिल्ली हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा और अलग-अलग हाई कोर्ट्स के दूसरे पूर्व जज शामिल हैं. इसके अलावा, 77 ब्यूरोक्रेट जिनमें पूर्व मुख्य सचिवों, राजदूतों और डीजीपी सहित और 25 सेना के पूर्व अधिकारी शामिल हैं.

क्यों पड़ी थी नूपुर शर्मा को फटकार?

एक टीवी चैनल पर डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा के बयान के बाद जमकर बवाल हुआ था. कुछ हिस्सों में जमकर हंगामा हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के बयान पर ऐतराज जताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी. उन्होंने पैगंबर पर एक विवादित टिप्पणी की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नूपुर ने अपने बयानों से देश का माहौल खराब किया है, जिसके लिए उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पिछले दिनों देश में कई ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं, जिनके लिए सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं.

‘किसी अकेले को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत’

रिटायर्ड जजों ने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है उसके लिए किसी अकेले को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. ऐसा कहने का कोई औचित्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में सिर्फ एक पक्ष को बढ़ावा दिया गया है. दिन के उजाले में नृशंसता के साथ सिर काटने की छूट किसी बयान की वजह से नहीं मिल सकती है.

‘सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने लांघी लक्ष्मण रेखा’

चिट्ठी में कहा गया है कि किसी भी देश का लोकतंत्र तब तक बरकरार रहेगा जब तक कि सभी संस्थान संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते. पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों की हालिया टिप्पणियों ने लक्ष्मण रेखा को पीछे छोड़ दिया है और हमें खुला खत लिखने के लिए मजबूर किया है.

खत में लिखा गया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ऐसा नजरिया रखता है तो उसकी तारीफ नहीं की जा सकती है. यह सुप्रीम कोर्ट की पवित्रता और सम्मान को प्रभावित करता है.

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