बिलासपुर में आयुष्मान कार्ड को लेकर कड़ाई

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बिलासपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत पंजीकृत शासकीय और निजी अस्पतालों को योजना की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्पष्ट किया गया है कि अस्पतालों में योजना का प्रचार-प्रसार नहीं होने और स्पेशियलिटी संबंधी जानकारी प्रदर्शित नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों को डि-एम्पेनल (पैनल से बाहर) भी किया जा सकता है।

योजना के अंतर्गत अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशन कार्डधारी परिवारों को प्रतिवर्ष प्रति परिवार (फैमिली फ्लोटर आधार पर) 5 लाख रुपये तक तथा अन्य पात्र परिवारों को 50 हजार रुपये तक निर्धारित चिकित्सा पैकेजों के तहत निश्शुल्क उपचार की सुविधा दी जाती है। इसके अतिरिक्त 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को वय वंदना योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का निश्शुल्क उपचार उपलब्ध है। इसके लिए आधार कार्ड में आयु 70 वर्ष या उससे अधिक होना आवश्यक है।

जिला स्तर पर निरीक्षण टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि कई अस्पतालों में योजना की जानकारी मुख्य प्रवेश द्वार, रिसेप्शन काउंटर या प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित नहीं की गई है। इतना ही नहीं, अस्पताल किस-किस स्पेशियलिटी में आयुष्मान योजना से पंजीकृत हैं, इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से नहीं लगाई गई है। इससे मरीजों और उनके स्वजन को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मरीज जिस बीमारी के लिए भर्ती होता है, उसका उपचार निर्धारित आयुष्मान पैकेज के अंतर्गत ही किया जाए। यदि कोई अस्पताल यह कहकर मरीज से नगद राशि लेता है कि संबंधित स्पेशियलिटी आयुष्मान से अपंजीकृत है, तो उसे गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। गाइडलाइन के अनुसार निजी अस्पतालों को अपने यहां उपलब्ध सभी स्पेशियलिटी के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। वे मनमर्जी से कुछ विशेष स्पेशियलिटी चुनकर ही पैनल में शामिल नहीं हो सकते।

स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि योजना के हितग्राहियों का निश्शुल्क इलाज करना अस्पतालों की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की मनमानी या गाइडलाइन का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अस्पताल को आयुष्मान से इलाज के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा। यह कदम निजी अस्पतालों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए उठाया गया है।

रजिस्ट्रेशन फीस, बेड चार्ज, दवाइयां, डाक्टर/स्पेशलिस्ट की फीस, भोजन, ब्लड/आक्सीजन शुल्क, ओटी फीस, प्रोस्थेटिक डिवाइस, इम्प्लांट के साथ डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक दवाइयां व जांच निश्शुल्क।

यह निर्देश जारी करने के साथ ही यह साफ कर दिया गया है कि जो भी चयनित निजी अस्पताल आयुष्मान भारत से उपचार करने के दौरान मनमानी करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्पेशियलिटी के नाम पर नगद वसूली बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, सभी उपलब्ध स्पेशियलिटी में पंजीकरण अनिवार्य रूप से होना चाहिए। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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