महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम तट पर बसे शिवरीनारायण नगर में 11 शताब्दी में हैह्य वंश के राजाओं ने मंदिर बनाया गया था। यहां छठवीं शताब्दी से लेकर 11वीं शताब्दी तक की प्रतिमाएं स्थापित हैं। शिवरीनारायण का महत्व रामायणकालीन होने की वजह से यह नगर श्रद्धालुओं के लिए भी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है। प्रतिवर्ष यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं और खुद को भगवान राम और माता शबरी के चरणों में न्यौछावर कर देते हैं। श्रद्धालुओं की आगाध आस्था को देखते हुए राज्य सरकार ने शिवरीनारायण का विकास करने का निर्णय लिया जो अब पूरा होने जा रहा है।शिवरीनारायण मंदिर परिसर का उन्नयन और सौदर्यीकरण: लगभग 11वीं शताब्दी का ये मंदिर भगवान राम और लक्ष्मण की आस्था का बड़ा केंद्र है। इसीलिए इसको बड़ा मंदिर भी कहते हैं। राज्य नवरात्रि और रामनवमीं जैसे त्यौहारों में श्रद्धालुओं को किसी तरह की तकलीफ ना हो इसके लिए मंदिर परिसर का उन्नयन किया गया है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के आराम के लिए भवन निर्माण किया गया है। इसके साथ ही नव निर्मित भवनों को भगवान राम की आस्था के अनुसार रंग रोगन किया है। मंदिर के विशाल द्वार का जीर्णोद्धार किया है। श्रद्धालुओं को दीप प्रज्ज्वलित करने में परेशानी न हो इसके लिए मंदिर परिसर के भीतर ही विशाल दीप स्तंभ का निर्माण किया गया है। ये सारे निर्माण और उन्नयन कार्य मुख्य मंदिर के प्रवेश द्वार के पूर्व किया गया है ताकि श्रद्धालु सुगमता पूर्वत भगवान राम के नारायणी अवतार के दर्शन कर सकें।
धमतरी में हाथियों का उत्पात, युवती समेत तीन लोगों की ली जान
Sun Apr 10 , 2022
Share on Social Mediaधमतरी में अब हाथियों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटे के दौरान हाथियों ने 22 साल की युवती सहित तीन लोगों की जान ले ली है। इसमें एक महिला भी शामिल है। हाथी ने उसे सूंड़ से उठाकर पटक दिया। इसके अलावा कई […]
