क्रिप्टो एक्सचेंज को संदिग्ध गतिविधियों और लेनदेन की जानकारी देनी होगी

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केंद्र सरकार ने क्रिप्टोकरंसी और डिजिटल परिसंपत्तियों को धनशोधन अधिनियम के प्रावधानों के दायरे में लाकर इनकी निगरानी और कड़ी कर दी है. इसके तहत भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को खुद वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू-भारत) को संदिग्ध गतिविधियों और लेनदेन की भी सूचना देनी होगी.

साथ ही क्रिप्टो एक्सचेंज पर होने वाला हर तरह का लेनदेन, वर्चुअल डिजिटल असेट्स (वीडीए ) का आदान-प्रदान और हस्तांतरण भी धन शोधन निवारण कानून के दायरे में आएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि क्रिप्टोकरंसी से जुड़े किसी भी गलत वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय भी कर सकेगा.

हाल ही में वित्त मंत्री ने कहा था कि क्रिप्टो माइनिंग, लेनदेन या पूंजी भारत में अभी व्यापक तौर पर अनियंत्रित है. यह पूरी तरह तकनीक आधारित है और इस पर कड़ी निगरानी की जरूरत है. इस दिशा में विनियमन के लिए सभी देशों को मिलकर प्रयास करने होंगे और अकेले किसी देश की कोशिश प्रभावी नहीं होंगी. अन्य सदस्य देशों से बातचीत कर मानक प्रोटोकॉल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

पिछले बजट में लगा टैक्स

पिछले बजट में वित्त मंत्री ने क्रिप्टो करंसी, नॉन-फंजीबल टोकन (एनएफटी) और अन्य तरह की डिजिटल मुद्राओं को वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के तहत जोड़ा था. इनसे होने वाली कमाई पर 30 फीसदी टैक्स लगाया गया है. इतना ही नहीं प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर एक फीसदी का टीडीएस भी लगा दिया गया, जो क्रिप्टो एक्सचेंजो को वसूलना होगा. टीडीएस एक जुलाई 2022 से प्रभावी हुआ.

वित्त मंत्रालय ने बैंकों और क्रिप्टो मंचों जैसी रिपोर्टिंग इकाइयों को अपने ग्राहकों से जानकारी एकत्र करना अनिवार्य कर दिया है. किसी रिपोर्टिंग इकाई में 10 प्रतिशत स्वामित्व रखने वाले किसी व्यक्ति या समूह को अब लाभार्थी मालिक माना जाएगा, जो पहले 25 प्रतिशत था. बैंक, रियल एस्टेट और आभूषण उद्योग की कंपनियां रिपोर्टिंग इकाई हैं. इनमें कैसीनो और क्रिप्टो या वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों के बिचौलियों को भी शामिल किया गया है. 10 लाख रुपये से ज्यादा के नकदी लेनदेन समेत सभी लेनदेन का ब्योरा रखना होगा.

पूरी तरह पाबंदी चाहता है आरबीआई

क्रिप्टोकरंसी के बढ़ते चलन पर आरबीआई चिंता व्यक्त कर चुका है और सरकार से इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की सिफारिश भी कर चुका है. आरबीआई का साफ कहना है कि क्रिप्टो कोई मु्द्रा नहीं है. एक रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा था कि अगर क्रिप्टोकरंसी भुगतान का माध्यम बनती है और गैरआधिकारिक रूप से घरेलू मुद्रा की जगह लेती है तो इससे देश की मौद्रिक संप्रभुता को खतरा पैदा हो सकता है.

क्या है क्रिप्टोकरंसी

क्रिप्टोकरंसी वित्तीय लेनदेन का एक जरिया है. इसका पूरा कारोबार ऑनलाइन माध्यम के जरिए होता है. यह पूरी तरह से आभासी है. इसे एक नेटवर्क की तरफ से संचालित किया जाता है, जिसे ब्लॉकचेन कहा जाता है. दुनियाभर में लगभग 19 हजार से अधिक क्रिप्टोकरंसी मौजूद हैं. यह सरकार द्वारा संचालित नहीं होते. इसे लेकर कई तरह के फर्जीवाड़े भी सामने आए हैं.

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