देवउठनी एकादशी 2023: जानें पूजा की सही विधि

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देवउठनी एकादशी 2023 पूजन विधि: देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह बाद अपनी योग निद्रा से उठते हैं और सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं. हिंदू घरों में इस दिन विशेष तौर पर पूजन किया जाता है और विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु को नींद से उठाया जाता है. इस दिन व्रत करने का भी विशेष महत्व है और सुबह उठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाएं.

देवउठनी एकादशी की पूजा शाम के समय की जाती है और इस दौरान दीवार पर देवता बनाए जाते हैं. फिर वहां सभी मौसमी फल जैसे कि गन्ना, शकरकंदी और सिंघाड़े आदि रखे जाते हैं. इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर घर के सभी सदस्यों के पैरों के निशान बनाए जाते हैं. इसके साथ ही रंगोली बनाने की भी परंपरा है. कहते हैं कि इससे देवता प्रसन्न होते हैं और खुश होकर घर में प्रवेश करते हैं. फिर थाली बजाकर देवताओं को जगाया जाता है और उनका आशीर्वाद मांगा जाता है.

देवउठनी एकादशी का गीत
उठो देव, जागो देव
देव उठेंगे कार्तिक मास, कार्तिक मास,
नई है टोकरी नई है कपास, नई है कपास
जारे मूसे दाव कटाए, दाव कटाए
दाव कटाए जब जेबरी बटाए, जेबरी बटाए
जेबरी बटाए जब खाट बुनाए, खाट बुनाए
खाट बुनाए जब बामन देयो, बामन देयो
बामन देयो गोरी गाय, गोरी गाय
माय पूजे धीए खिलाए
वा को पुन्य अखंड जाए
भाभी पूजे नंदुल खिलाए
या को पुन्य महाफल होए
भुडभुडइया को आयो ताज
राज करें बच्चों को बाप
भुडभुडइया को आयो ताज
राज करें बच्चों को बाप
ओरे कोरे धरे चपेटा, धरे चपेटा
गुलाबो राज करें तेरे ही बेटा, तेरे ही बेटा
ओरे कोरे धरे मजीरा, धरे मजीरा
ये हैं बहनो तुम्हारे ही बीरा, तुम्हारे ही बीरा
उठे देव, जगे देव,
देव उठ गए कार्तिक मास!

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