बीजापुर के बाद कोंटा में भी शर्मनाक मामला: आवासीय विद्यालय की नाबालिग छात्रा गर्भवती

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कोंटा। बस्तर संभाग के आवासीय विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। बीजापुर जिले के गंगालूर छात्रावास में तीन छात्राओं के गर्भवती मिलने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब सुकमा जिले के कोंटा ब्लाक से भी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है।
परीक्षा देने जाते समय चक्कर आया और गिर गई

यहां एक बालिका आवासीय विद्यालय की नाबालिग छात्रा के गर्भवती पाए जाने से प्रशासन में हड़कंप है। कोंटा स्थित आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली 10वीं की छात्रा 9 मार्च को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल पहुंची। अंतिम परीक्षा के दिन परीक्षा देने जाते समय छात्रा को चक्कर आया और वह गिर गई।

जांच में उसके गर्भवती होने का खुलासा हुआ

इसके बाद उसे अत्यधिक रक्तस्राव (हेवी ब्लीडिंग) की स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंटा में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल सुकमा रेफर किया, जहां जांच में उसके गर्भवती होने का खुलासा हुआ।
पुलिस ने एक युवक को किया गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक के खिलाफ अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी युवक भी एक आवासीय विद्यालय का छात्र बताया जा रहा है। वहीं, यह आशंका भी जताई जा रही है कि छात्रा ने गर्भपात की दवा का सेवन किया था, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी। हालांकि दवा कहां से और कैसे मिली, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।
गंगालूर छात्रावास में तीन छात्रा गर्भवती मिली थीं

लगातार आ रहे मामले दो दिन पहले बीजापुर जिले के गंगालूर छात्रावास में तीन छात्राओं के गर्भवती मिलने का मामला सामने आया था, जिनमें दो नाबालिग थीं। उस मामले में भी छात्राओं की लंबे समय तक अनुपस्थिति और स्वास्थ्य जांच की अनदेखी को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।

दो वर्ष पहले भी एक नाबालिग के गर्भवती होने का मामला आया था

गंगालूर के इसी छात्रावास में दो वर्ष पहले भी एक नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने का मामला आया था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था और स्कूलों में यौन शिक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि छात्राएं इतनी संवेदनशील स्थिति तक पहुंचीं, लेकिन समय रहते न तो प्रबंधन को जानकारी हुई और न ही किसी प्रकार का हस्तक्षेप किया गया।

बीते सप्ताह यह मामला सामने आया था, जिसके बाद पुलिस में अपराध दर्ज कराया गया है। इस तरह की घटनाओं को रोकने जिले के स्कूल और छात्रावास में काउंसलिंग कार्यक्रम भी चला रहे हैं।

–अमित कुमार, कलेक्टर सुकमा

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