हार्ट सर्जरी मरीजों को फंगस और बदबूदार वार्ड में रखा

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रायपुर: प्रदेश के सबसे बड़े और एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में मरीजों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां हार्ट सर्जरी से पहले और बाद में मरीजों को जिन वार्ड और ICU में रखा जाता है, उनकी हालत बेहद खराब बताई जा रही है। अस्पताल के कमरों और वार्ड में साफ-सफाई का अभाव है और कई जगहों पर फंगस तथा फफूंद दिखाई दे रही है।

हार्ट सर्जरी के बाद मरीजों का शरीर बेहद कमजोर हो जाता है और उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए साफ और सुरक्षित वातावरण की जरूरत होती है। लेकिन इस अस्पताल में मरीजों को जिन कमरों में रखा जा रहा है, वहां गंदी बदबू और घुटन का माहौल है। हालात ऐसे हैं कि कई बार मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों के लिए भी वहां रुकना मुश्किल हो जाता है।

कमरों की दीवारों पर जगह-जगह फफूंद जमी हुई है, जबकि फर्श कई स्थानों पर टूटकर उखड़ चुका है। वार्ड में फैली गंदगी और बदबू के कारण मरीजों को संक्रमण का खतरा लगातार बना रहता है।

डॉक्टरों के अनुसार इस कार्डियक सेंटर की स्थिति पहले ऐसी नहीं थी। बताया जाता है कि वर्ष 2017 से पहले इस सेंटर का संचालन एस्कार्ट एजेंसी द्वारा किया जाता था। उस समय अस्पताल में साफ-सफाई और मरीजों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता था।

लेकिन एस्कार्ट एजेंसी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद हालात धीरे-धीरे खराब होते चले गए। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 के बाद से वार्ड में न तो पुताई की गई है और न ही मरम्मत का कोई बड़ा काम हुआ है। कई वर्षों से रखरखाव नहीं होने के कारण वार्ड की हालत जर्जर हो गई है।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आंबेडकर अस्पताल की बिल्डिंग के सुधार और रेनोवेशन के लिए करीब 50 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसके तहत अस्पताल और वार्ड को नया रूप देने की योजना है। प्रबंधन के मुताबिक इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

हालांकि, मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें भविष्य के वादों से ज्यादा मौजूदा हालात की चिंता है। जब तक टेंडर पास होकर काम शुरू होगा, तब तक मरीजों को इसी खराब और गंदे माहौल में रहना पड़ रहा है।

मरीजों का कहना है कि सर्जरी के बाद उन्हें सिर्फ इतना चाहिए कि अस्पताल में साफ-सुथरा कमरा और वार्ड मिले, जहां बदबू और फंगस न हो। प्रदेश के इतने बड़े हार्ट सेंटर में बुनियादी सुविधाओं की कमी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अस्पताल की दीवारों पर वुडन (लकड़ी) की कोटिंग होने से नमी की वजह से फफूंद की समस्या आ रही है। इसके समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देशित कर दिया है। जल्द ही मरम्मत शुरू हो जाएगी। साथ ही पूरी बिल्डिंग के रेनोवेशन की योजना है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया की जा रही है।

-डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल

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