मुर्गीपालन से बदली अनुसुइया नेताम की जिंदगी

rashtra path
0 0
Share on Social Media
Read Time:4 Minute, 12 Second

शासन के आर्थिक सहयोग और स्वयं की मेहनत से बनीं आत्मनिर्भर

रायपुर । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूह आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जो महिलाएं पहले केवल घर और परिवार तक सीमित थीं, आज वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में  उत्तर बस्तर कांकेर जिले के सुदूरवर्ती अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम बेलोंडी की श्रीमती अनुसुइया नेताम ने मुर्गीपालन व्यवसाय के माध्यम से सफलता की नई मिसाल कायम की है।

श्रीमती नेताम ने बताया कि उनका परिवार पहले मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर था। वर्षा आधारित खेती होने के कारण कई बार फसल अच्छी नहीं होती थी, जिससे परिवार की आय अस्थिर और सीमित रहती थी। आय कम होने के कारण घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इस परिस्थिति से उबरने के लिए उन्होंने जय मां संतोषी स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गीपालन को आजीविका के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। समूह के माध्यम से उन्होंने 30 हजार रुपए का ऋण लेकर मुर्गीपालन व्यवसाय की शुरुआत की। धीरे-धीरे इस व्यवसाय से उन्हें अच्छी आमदनी मिलने लगी।

श्रीमती अनुसुइया नेताम ने समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत का महत्व, ऋण प्रबंधन और छोटे व्यवसायों के संचालन की जानकारी मिली। साथ ही महिलाओं को आय बढ़ाने के विभिन्न तरीकों और शासकीय योजनाओं के बारे में भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा जागृत हुई। वे ‘सूर्या महिला ग्राम संगठन बेलोंडी’ और ‘आशा महिला क्लस्टर संगठन अमाबेड़ा’ की बैठकों में भी नियमित रूप से भाग लेने लगीं।

व्यवसाय की शुरुआत में उन्होंने लगभग 360 देशी चूजों की खरीदी की, जिस पर करीब 11 हजार 880 रुपए खर्च हुए। इसके अतिरिक्त दाना, पानी के बर्तन, वैक्सीन और टॉनिक आदि पर भी खर्च किया गया। इस प्रकार मुर्गीपालन व्यवसाय में कुल मिलाकर लगभग 33 हजार 360 रुपए का प्रारंभिक निवेश किया गया।

श्रीमती अनुसुइया नेताम ने बताया कि कुछ महीनों की मेहनत के बाद मुर्गियां अच्छी तरह विकसित होकर बिक्री के लिए तैयार हुईं। इसके बाद उन्होंने लगभग 200 मुर्गियां बेचकर 55 हजार रुपए की शुद्ध आय अर्जित की। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और अब बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।

स्व-सहायता समूह, ग्राम संगठन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से श्रीमती अनुसुइया नेताम ने मुर्गीपालन के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी, रोकी गई सुनवाई, डॉग और बम स्क्वायड जांच में जुटे

Share on Social Media बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला लगातार जारी है। सोमवार को एक बार फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद हाईकोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद एहतियात के तौर […]

You May Like