पीआरएसयू छात्रावास में दूषित पानी से 12 छात्राएं पीलिया की शिकार, दो एम्स में भर्ती

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रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के नवीन कन्या छात्रावास में दूषित पानी पीने से एक दर्जन से अधिक छात्राएं पीलिया (जान्डिस) से ग्रसित हो गईं। इनमें से दो छात्राओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें एम्स में भर्ती कराना पड़ा।

जानकारी के अनुसार मूल विज्ञान केंद्र की कई छात्राएं कुछ दिनों से उल्टी, कमजोरी और पीलिया जैसे लक्षणों से पीड़ित पाई गईं। जांच के बाद संक्रमण की पुष्टि होने पर छात्राओं का उपचार शुरू किया। संक्रमण फैलने की आशंका से छात्रावास की कई छात्राएं घर लौट गई हैं। वहीं एनएसयूआइ ने पेयजल की तत्काल लैब जांच की मांग की है।

दूषित पानी की शिकायत पहले भी

छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास में लंबे समय से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन नियमित सफाई और तकनीकी जांच नहीं कराई गई। वाटर कूलरों की समय पर सफाई और पानी की जांच नहीं होने से संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है। छात्राओं का कहना है कि पानी में बदबू और रंग बदलने की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं, लेकिन प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

तीन दिन का अल्टीमेटम

मामले को लेकर एनएसयूआई के छात्र प्रतिनिधि प्रशासनिक भवन पहुंचे और कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पेयजल की तत्काल लैब जांच, छात्रावास का तकनीकी निरीक्षण, सभी वाटर कूलरों की नियमित सफाई तथा जिन विभागों में कूलर नहीं हैं वहां नए कूलर लगाने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि तीन दिवस के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध उग्र आंदोलन किया जाएगा।

प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल

छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण स्थिति बिगड़ी। यदि नियमित निगरानी और पानी की गुणवत्ता की जांच होती तो छात्राओं के बीमार होने की नौबत नहीं आती।

इनका क्या कहना है

“छात्रावास में दूषित पानी से सामूहिक रूप से छात्राओं के बीमार होने की पुष्टि नहीं हुई है। कुछ छात्राएं सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थीं, जिनका उपचार कराया जा रहा है। एहतियात के तौर पर पानी की जांच और छात्रावास की सफाई कराई जा चुकी है तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”

— प्रो. राजीव चौधरी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय

“एक दर्जन से अधिक छात्राएं पीलिया से ग्रसित हुई हैं। दो को एम्स में भर्ती करना पड़ा है, जो घटना की गंभीरता को दर्शाता है। संगठन का आरोप है कि दूषित पानी की शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसके कारण संक्रमण फैला। उन्होंने स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।”

— पुनेश्वर लहरे, प्रदेश उपाध्यक्ष,एनएसयूआई, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय

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