रायपुर। साय सरकार ने आम लोगों को पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े इसके लिए जमीन की रजिस्ट्री के बाद तुरंत नामांतरण की सुविधा प्रदान की, लेकिन अधिकारी भी तू डाल-डाल, तो मैं पात-पात वाली तर्ज पर काम करते हुए इस सुविधा के लाभ से खरीदारों को वंचित कर रहे हैं. नई ऋण पुस्तिका के लिए खरीदारों को तहसीलदारों की दरबार में हाजिरी लगानी पड़ रही है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी साल जून में नया नियम बनाया, जिसमें जमीन की रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण हो जाता है. अब रजिस्ट्री के बाद जमीन खरीदार के नाम भी चढ़ जा रहा है, लेकिन जमीन की ऋण पुस्तिका के लिए खरीदारों को पहले पटवारी और उसके बाद तहसील कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि तहसीलदारों ने पटवारियों को शासन के स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने का हवाला देते हुए नई ऋण पुस्तिका के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन देना अनिवार्य कर दिया है. यह तो बहाना है इसके पीछे की मंशा साफ है कि खरीदार आवेदन के बहाने दरबार में हाजिरी लगाए, चढ़ावा चढ़ाए फिर काम होगा. यह परेशानी आंकड़ों में साफ नजर आ रही है. जहां अकेले रायपुर जिले में ही ऐसे 3 हजार से ज्यादा मामले हैं, जिनमें खरीदारों को जमीन रजिस्ट्री के बाद जमीन की ऋण पुस्तिका नहीं मिल पाई है. वहीं प्रदेश की बात करें तो इस तरह के 50 हजार से ज्यादा मामले हैं.
सरकार फरमान पर तहसीलदार भारी, रजिस्ट्री के बाद तुरंत नामांतरण की सुविधा का नहीं मिल पा रहा लाभ, ऋण पुस्तिका के लिए दरबार में हाजिरी लगानी जरूरी
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