सरगुजा में हाथियों के बाद अब तेंदुओं का आतंक

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अंबिकापुर. सरगुजा वनवृत्त अंतर्गत 6 जिलों में अब तक हाथियों व भालुओं द्वारा ही जान-माल को नुकसान पहुंचाया जाता रहा है. इस बीच पिछले कुछ दिनों से तेंदुओं के आतंक से लोग दहशत में हैं. दिसंबर महीने में कोरिया जिले में तेंदुओं ने 2 महिलाओं, 1 युवक और करीब डेढ़ दर्जन मवेशियों को मार डाला. तेंदुए ने एक बालक को घायल भी किया था. बहरहाल वन विभाग के पास सरगुजा वनवृत्त में विचरण करने वाले तेंदुओं का आंकड़ा नहीं है. ऐसे में तेंदुओं के हमले से बचने हम कितने तैयार हैं, यह एक सवाल है. हाथियों के उत्पात से सरगुजा वनवृत्त अंतर्गत सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, जशपुर, बलरामपुर व एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के लोग परेशान हैं.

हाथियों द्वारा लोगों की जान लेने के साथ ही फसलों व काफी संख्या में घरों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है. इन सबके बीच अब तेंदुए मुसीबत पैदा कर रहे हैं.

3 लोगों का अब तक शिकार : कोरिया से अलग होकर बने नए जिले एमसीबी के जनकपुर क्षेत्र में दिसंबर 2022 में तेंदुओं ने 2 महिलाओं को मार डाला था, वहीं 8 वर्षीय एक बालक को घायल कर दिया था. 15 जनवरी की सुबह भी एक युवक की मौत तेंदुए के हमले में हुई. इसके अलावा 10 जनवरी को सूरजपुर जिले के बिहारपुर क्षेत्र में 12 बकरियों को मार डाला था.

वनांचल ब्लॉक जनकपुर में तेंदुए के हमले में एक युवक की मौत के बाद आसपास के ग्रामीण आक्रोशित हैं. मामले में सोमवार सुबह तेंदुआ गांव के पास अरहर बाड़ी में घुसा, वैसे ही ग्रामीणों ने चारों ओर से बाड़ी घेर ली. आला अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस, फॉरेस्ट, राजस्व व वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की टीम तैनात है. जनकपुर परिक्षेत्र के ग्राम कुंवारी में रविवार शाम तेंदुए ने ग्रामीण रमदमन बैगा को मार डाला और सोमवार को ग्राम नौढ़िया में लगी अरहर के खेत में घुस गया. इसके बाद ग्रामीणों ने चारों ओर से बाड़ी घेर ली.

मनेंद्रगढ़ डीएफओ लोकनाथ पटेल सहित रायपुर-अंबिकापुर से मौके पर आला अधिकारी-एक्सपर्ट पहुंचे. साथ ही बाड़ी में छिपे तेंदुए को खोजने ड्रोन कैमरे की मदद ली और एक पेट्रोलिंग वाहन को बाड़ी के भीतर भेजा. सुबह करीब 9 से शाम 6 बजे तक जद्दोजहद करती रही. लेकिन तेंदुआ नहीं मिला. वन अमले ने शाम को अरहर की बाड़ी में तेंदुआ को फंसाने पिंजड़े में श्वान के पिल्ले को बांध दिया. साथ ही खोजी श्वान लेकर आए तेंदुए की तलाश की जा रही है.

सरगुजा संभाग में हाथियों व भालुओं के बाद अब तेंदुए आतंक का नया पर्याय बनते जा रहे हैं. इससे निपटने वन विभाग के पास न तो कोई तैयारी है और न ही तेंदुए के आंकड़े उपलब्ध हैं. तेंदुओं को पकड़ने सही पिंजरे भी नहीं हैं, ऐसे में वनांचल क्षेत्र में रहने वाले लोग दहशत में जी रहे हैं.

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