सहायक संचालक से उपसंचालक की पदोन्नति में गड़बड़ी सार्वजनिक होने के बाद हंगामा मचा हुआ है। वही मामले की शिकायत विभागीय मंत्री अनिला भेंडिया तक पहुंची है। महिला बाल विकास विभाग में 26 मई को सहायक संचालक से उपसंचालक के लिए डीपीसी हुई थी जिसमे निचले क्रम के सहायक संचालको को पदोन्नत करने सीनियर अधिकारियो को अयोग्य ठहरा दिया गया है। अब मामला सार्वजनिक होने के बाद बवाल मच गया है,, उधर मंत्री ने भी फाइल लौटा दी है।
संचालनालय में लंबे समय से जमे अधिकारियो ने पदोन्नति के लिए पुरे नियमो को ताक पर रख दिया। साल 2022 में 1 अप्रैल 2021 को बनी वरिष्ठता सूची का उपयोग किया जिसमे तीन उपसंचालको के नाम जानबूझकर हटा दिए। पूरी गड़बड़ी एक सहायक संचालक को पदोन्नत करने के लिए की गई। चर्चा है कि इस पुरे प्रकरण में स्थापना प्रभारी उपसंचालक रामजतन कुशवाहा ने योजनबद्ध तरीके से सही गणना कर प्रस्ताव नहीं दिया और संचालक को भ्रामक जानकारी देकर धोखे में रखा। अधिकारियो की लापरवाही का ठीकरा संचालक पर फूट रहा है।
उधर डीपीसी पर अप्रूवल लेने संचालक सहित स्थापना प्रभारी रामजतन कुशवाहा, संयुक्त संचालक दिलदार सिंह मरावी और सहायक संचालक सुनील शर्मा सहित टीम मंत्री अनिला भेंडिया से पहुंची तो मंत्री फाइल रोक दिया है। बताते है इस कारनामे के बाद स्थापना प्रभारी सहित अन्य पर कार्यवाही हो सकती है। उधर प्रभावित होने वाले सहायक संचालको ने सचिव और मंत्री को डीपीसी की जाँच करने और पदोन्नति रोकने की मांग की है।
