छत्तीसगढ़ में तेज रफ्तार का कहर, 4250 लोगों की गई जान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बेकाबू रफ्तार काल बन गई है। पिछले एक साल के आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। प्रदेश में साल भर के भीतर कुल 17,643 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 4,250 लोगों की जान चली गई। औसतन हर महीने 1,319 हादसे हो रहे हैं और 318 परिवार अपनों को खो रहे हैं।

राजधानी रायपुर हादसों और मौतों में शीर्ष पर है, जहां सर्वाधिक 425 लोगों की मृत्यु हुई। इसके बाद दुर्ग, कोरबा और रायगढ़ का स्थान है। सड़क दुर्घटनाओं में 3,012 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। पुलिस प्रशासन की सख्ती के बावजूद ब्लैक स्पॉट और यातायात नियमों की अनदेखी इन मौतों की मुख्य वजह बनी हुई है।

सड़क हादसों के मामले में प्रदेश की राजधानी रायपुर की स्थिति सबसे चिंताजनक है। रायपुर जिला हादसों और मौतों, दोनों ही सूची में मेरिट में टॉप पर बना हुआ है। बीते एक साल में रायपुर में सर्वाधिक 2,368 सड़क दुर्घटनाओं में 425 लोगों की मौत हुई है। रायपुर के अलावा दुर्ग, बिलासपुर और कोरबा ही वे जिले हैं जहां हादसों की संख्या एक हजार के पार पहुंची है।

हादसों के बाद अस्पताल में दम तोड़ने वाले नागरिकों की कुल संख्या 61 रही। चौंकाने वाली बात यह है कि मौके पर होने वाली मौतों के अलावा उपचार के दौरान सर्वाधिक मौतें सुकमा जिले में 22 हुई है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में यह आंकड़ा 12 रहा, जो मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बराबर है।वहीं, राज्य भर में गंभीर रूप से घायलों की संख्या 3,012 दर्ज की गई है।

अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) के अध्यक्ष और एआइजी ट्रैफिक संजय शर्मा का कहना है कि सड़कों पर ब्लैक स्पॉट का होना और वाहनों की तेज रफ्तार के साथ चालकों द्वारा हेलमेट व सीट बेल्ट के प्रति लापरवाही, यातायात नियमों का उल्लंघन करने से हादसे में बढ़ोत्तरी हो रही है।

सबसे अधिक युवा वर्ग हादसे के शिकार होने के साथ मौत के मुंह में समा रहे हैं। पुलिस और परिवहन विभाग जागरूकता अभियान चलाकर मौतों को कम करने की कोशिश में लगे हैं। वाहन चालक अगर यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने लगे तो काफी हद तक इन हादसों को रोका जा सकता है।

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