फायर NOC प्रक्रिया में बदलाव से बढ़ते आर्थिक बोझ पर चिंता

rashtra path
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रायपुर।  हाल ही में प्रकाशित समाचार, जिसमें “फ्री फायर NOC खत्म” कर निजी एजेंसियों को कार्य सौंपने तथा ऑडिट के नाम पर वार्षिक शुल्क वसूली की बात सामने आई है, गंभीर चिंता का विषय है।
इस निर्णय के तहत अब निजी एजेंसियों द्वारा प्रति वर्गफुट के हिसाब से शुल्क लिया जा रहा है, जिससे अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पहले जहां फायर NOC प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और निःशुल्क थी, वहीं अब ऑडिट के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की जा रही है।
मुख्य चिंताएं:
 1. आर्थिक बोझ में वृद्धि: छोटे और मध्यम संस्थानों के लिए यह शुल्क वहन करना कठिन हो रहा है।
 2. पारदर्शिता की कमी: निजी एजेंसियों द्वारा शुल्क निर्धारण और ऑडिट प्रक्रिया में स्पष्टता का अभाव है।
 3. सार्वजनिक सेवाओं पर असर: अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की लागत बढ़ने से आम जनता पर अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक दबाव पड़ेगा।
 4. जवाबदेही का अभाव: निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता पर पर्याप्त निगरानी सुनिश्चित नहीं दिख रही है।
हमारी मांगें:
 • इस निर्णय की पुनः समीक्षा की जाए।
 • फायर NOC एवं ऑडिट प्रक्रिया को पारदर्शी और किफायती बनाया जाए।
 • छोटे संस्थानों के लिए शुल्क में छूट या सब्सिडी दी जाए।
 • निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी और जवाबदेही तय की जाए।
हम संबंधित विभागों से आग्रह करते हैं कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस नीति में आवश्यक संशोधन करें, ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।
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