6 महीने से नहीं मिली नसबंदी प्रोत्साहन राशि

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महासमुंद। जिले में महिला स्वास्थ्य योजनाओं की जमीनी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले की एक हजार से अधिक महिलाओं को बीते छह महीनों से स्त्री नसबंदी प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पाई है। योजना के तहत शासकीय अस्पतालों में नसबंदी कराने वाली महिलाओं को दो हजार रुपये और डिलीवरी के साथ नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन भुगतान में हो रही देरी के कारण लाभार्थी महिलाएं परेशान हैं।

प्रोत्साहन राशि पर निर्भर

जानकारी के अनुसार महासमुंद मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सैकड़ों महिलाओं ने परिवार नियोजन के तहत नसबंदी कराई है। नसबंदी के समय शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी राशि उनके खातों में जमा नहीं हुई। कई महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं और इस प्रोत्साहन राशि पर घरेलू जरूरतों के लिए निर्भर थीं।

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि नसबंदी के बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उन्हें कामकाज में दिक्कत आई। ऐसे में प्रोत्साहन राशि मिलने से राहत मिल सकती थी, लेकिन भुगतान नहीं होने से उन्हें कर्ज लेने की स्थिति बन गई। कई बार स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही के चलते भुगतान में देरी हुई

सूत्रों के अनुसार शुरुआत में बजट की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते भुगतान में देरी हुई। हालांकि डेढ़ महीने पहले शासन से मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास फंड उपलब्ध करा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को राशि जारी नहीं की गई। इससे भुगतान में अनावश्यक विलंब हो रहा है और हितग्राहियों के बीच सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है।

सीएमएचओ डॉ. आई. नागेश्वर राव जल्द भुगतान की बात कह रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इधर महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार नियोजन जैसी महत्वपूर्ण योजना में यदि समय पर प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी, तो भविष्य में महिलाएं ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बना सकती हैं।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लंबित भुगतान को कब तक पूरा कर पाते हैं और महिलाओं को उनका हक कब मिलेगा।

दो अधिकारियों के खराब संबंधों का खामियाजा भुगत रही जनता

मेडिकल कॉलेज अस्पताल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बीच तालमेल की कमी सामने आ रही है। वर्तमान सीएमएचओ डॉ. आई. नागेश्वर राव नवंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमएस डॉ. बसंत माहेश्वरी के अधीन वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे थे। जनचर्चा है कि उस दौरान दोनों के संबंध मधुर नहीं रहे। सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ पद पर आने के बाद भी आपसी मतभेद के कारण फंड रिलीज करने में टालमटोल हो रही है। इसका असर जननी सुरक्षा योजना, स्त्री नसबंदी प्रोत्साहन योजना सहित अन्य हितग्राही योजनाओं पर पड़ रहा है और सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

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