जगदलपुर/रायपुर. पहाड़ों और घने जंगलों की खूबसूरती के लिए चर्चित बस्तर इन दिनों बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना है. हालात इतने गंभीर हैं कि विदेश दौरे के बीच मुख्यमंत्री साय ने राहत और बचाव कार्य की जानकारी ली. इस बार बस्तर में बारिश का 94 साल का रिकॉर्ड टूट गया है. एक दिन में 210 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. यहां सोमवार रात से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, बस्तर में 94 साल रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है. 24 घंटे में 217 मिमी बारिश हुई है. इससे पहले 1931 में इतनी बारिश हुई थी. मूसलाधार बारिश के कारण जिले के नदी-नाले उफान पर हैं. कई गांवों का सम्पर्क भी टूट गया है. जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. वहीं जगदलपुर में इंद्रावती की सहायक गोरिया बाहर नाला उफान पर है, जिसकी वजह से सांसद निवास कलचा सहित दर्जनों गांवों का संपर्क जगदलपुर शहर से टूट गया है. जगदलपुर शहर के आधा दर्जन वार्ड भी पानी की चपेट में आ चुके हैं, कई घरों में पानी घुस गया है. इस बीच, गोरिया बाहर नाला में तीजा पर्व पर पूजा के सामान के विसर्जन के लिए महिलाएं, पुरुष और बच्चे पहुंच रहे हैं. जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है, फिर भी वहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं है और लोग जान जोखिम में डालकर विसर्जन कर रहे हैं. बारिश का सबसे ज्यादा असर लोहंडीगुड़ा के मांदर गांव में देखने को मिला, जहां बाढ़ से 85 परिवारों को विस्थापित होना पड़ा.
बस्तर में टूटा 94 साल का रिकॉर्ड : लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
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