लैंडर और रोवर के जागने की उम्मीद कम

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बेंगलुरु . एक प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने कहा कि अब चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर के जागने की कोई उम्मीद नहीं है, जो भारत के तीसरे चंद्र मिशन के संभावित अंत का संकेत है.

मिशन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने कहा, ‘नहीं, नहीं, इसके पुनरुद्धार की कोई उम्मीद नहीं है. अगर यह होना चाहिए था, तो अब तक हो गया होता. अब कोई संभावना नहीं है.’ चंद्रमा पर नया चंद्र दिवस शुरू होने के बाद इसरो ने 22 सितंबर को कहा था, ‘सौर ऊर्जा संचालित विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ संचार स्थापित करने के प्रयास किए गए हैं ताकि उनकी जागने की स्थिति का पता लगाया जा सके. फिलहाल उनकी ओर से कोई संकेत नहीं मिले हैं. संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी रहेंगे.’

राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा पर सूरज डूबने से पहले क्रमश 4 और 2 सितंबर को लैंडर और रोवर को स्लीप मोड में डाल दिया था, जिससे 22 सितंबर के आसपास अगले सूर्योदय पर उनके जागने की उम्मीद थी. लैंडर और रोवर को एक चंद्र दिन की अवधि (लगभग 14 पृथ्वी दिवस) तक संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

इसरो अधिकारियों के अनुसार, सभी तीन चंद्रयान मिशन के उद्देश्य- चंद्रमा की सतह पर एक सुरक्षित और नरम लैंडिंग का प्रदर्शन, चंद्रमा पर घूमने वाले रोवर का प्रदर्शन और इसके द्वारा चंद्र सतह पर पेलोड और लैंडर का इन-सीटू वैज्ञानिक प्रयोगों का उपक्रम हासिल कर लिया गया है.

चंद्रमा पर उतरने के बाद लैंडर के वैज्ञानिक पेलोड और 26 किलोग्राम के छह पहियों वाले रोवर ने एक के बाद एक प्रयोग किए ताकि उन्हें 14 पृथ्वी दिनों के भीतर पूरा किया जा सके. इसके बाद चंद्रमा पर गहरा अंधेरा और अत्यधिक ठंड का मौसम छा गया. इसरो के अधिकारियों ने कहा था कि अगर वह लैंडर और रोवर के साथ संचार फिर से स्थापित कर लेता है तो यह ‘बोनस’ होगा.

बता दें कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर साफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश है. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन चांद तक पहुंच चुके हैं.

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