नई दिल्ली . पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच कायम गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार और प्रतिबद्ध है. पड़ोसी देशों के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमाओं पर शांति जरूरी है.
जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को हिरोशिमा रवाना होने से पहले मोदी ने जापान के प्रकाशन निक्केई एशिया को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है. भारत-चीन संबंधों का भावी विकास केवल आपसी सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और द्विपक्षीय हितों पर आधारित हो सकता है. संबंधों के सामान्य होने से क्षेत्र और दुनिया को व्यापक लाभ होगा.
प्रधानमंत्री ने संप्रभुता, कानून के शासन और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए देश के सम्मान पर जोर दिया. पाकिस्तान पर सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि भारत सामान्य और पड़ोसियों वाले संबंध चाहता है. मगर, आतंकमुक्त और अनुकूल माहौल बनाना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है. इसके लिए जरूरी कदम उठाए.
मोदी ने कहा, हम 2014 में दसवीं अर्थव्यवस्था से उठकर विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं. हालांकि, यह सच है कि विश्व में विपरीत परिस्थितियां विकास के लिए चुनौतियां पैदा करती हैं. भारत ने हाल के वर्षों में एक मजबूत नींव बनाई है, जो हमें अनुकूल स्थिति में रखती है.
भारतीयों से मिले पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान में हिरोशिमा के होटल शेरेटन पहुंचकर भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की. हवाई अड्डे पर जापान, भारत के अधिकारियों ने मोदी का स्वागत किया. जापान में रह रहे भारतीयों ने पीएम से मुलाकात के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए.
