शिवसेना मामले पर बड़ी पीठ में शुरू हुई सुनवाई

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शिवसेना बनाम शिवसेना मामले की उच्चतम न्यायालय में पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई मंगलवार को शुरू हो गई.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष शिंदे गुट के वकील हरीश साल्वे ने उद्धव गुट की मांग पर आपत्ति जताई और कहा कि मामले को लेकर जब वह नए स्पीकर के खिलाफ उच्चतम न्यायालय आए थे, तो खुद उन्होंने नबाम रेबिया के फैसले पर भरोसा किया था. अब इस पर सवाल उठाते हुए बड़ी बेंच को भेजने की मांग कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इस पर पुनर्विचार किया जाए.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले ठाकरे गुट को बहस करने दीजिए, आप बाद में जवाब दे सकते हैं. ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हम नबाम रेबिया फैसले की इसलिए जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह अयोग्य विधायकों के लिए एक उपकरण बन गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्पीकर की अयोग्यता नोटिस देने के बाद वह कार्रवाई न कर पाएं. इसके बाद राजनीति काबू हो जाती है. फिर सरकार गिरा दी जाती है और नया स्पीकर आ जाता है.

नबाम रेबिया फैसला

नबाम रेबिया मामले में पीठ का फैसला (2016 जस्टिस जेएस खेहर, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश) कहता है कि यदि किसी विधानसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव सदन में लंबित है तो वो 10वीं अनुसूची के तहत विधायकों को अयोग्य करार नहीं दे सकता. यही मामला महाराष्ट्र में हुआ है, जब वह शिवसेना के बागी विधायकों को अयोग्य करार दे रहे, तो किसी विधायक ने अविश्वास का नोटिस दे दिया था.

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