शहद से भी मीठा काले रंग का सेब, कभी देखा नहीं होगा, हर 8 साल में ‘ब्लैक डायमंड’ उगलती हैं तिब्बत की पहाड़ियां

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फलों को सेहत का टॉनिक कहते हैं. डॉक्टर भी अच्छी हेल्थ के लिए रोजाना एक सेब खाने की सलाह देते हैं. बाजार में लाल रंग के सेब ठीक-ठीक दाम पर मिल जाते हैं, जिसे कोई भी खरीदकर खा सकता है, लेकिन आज हम आपको बताएंगे सेब की खास वैरायटी ब्लैक डायमंड के बारे में, जो बेहद दुर्लभ है और सिर्फ तिब्बत की पहाड़ियों, भूटान और अमेरिका के कुछ इलाकों में ही पैदा होता है. दुनिया इसे ब्लैक डायमंड एप्पल या अर्कानसास सेब के नाम से भी जानती है, जो खाने में तो लजीज होता ही है, इसके अपने औषधीय गुण भी होते हैं.

वैसे तो तिब्बत के लोग इसे नियू कहते हैं, लेकिन भारत में यह काले सेब के नाम से फेमस हो रहा है. हमारे यहां ब्लैक डायमंड के बारे में बेहद कम लोग जानते हैं, क्योंकि 8 साल में एक बार उगने वाला ये फल तिब्बत के लोगों को ही ढंग से नसीब नहीं होता. तिब्बत की पहाड़ियों में इसे उगाकर चीन के बड़े-बड़े शहरों में भेज  दिया जाता है. ब्लैक डायमंड एप्पल की कीमत इतनी ज्यादा है कि इतने में आप 10-15 किलो लाल सेब खरीदकर सेहत बना सकते है. एक्सपर्ट्स की मानें तो काले सेब को उगाने का तरीका भी एक दम अलग है, जिसकी वजह से काफी दुर्लभ और महंगे हैं.

किसान तक में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक डायमंड एप्पल किलो के भाव नहीं बिकता. ये फल 8 साल में एक बार उगता है और सिर्फ 2 महीने के अंदर इसकी हार्वेस्टिंग करनी होती है, इसलिए एक ही काले सेब की कीमत 50 युआन आंकी गई है, जो भारतीय करेंसी के हिसाब से 500 से लेकर 1,600 रुपये है.

काले सेब को 2015 में पहली बार तिब्बत की पहाड़ियों में उगाया गया, जिसके बाद ये सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड होने लगे. हैरान करने वाली बात ये है कि काले सेब की बागवानी करने वाले तिब्बती भी इन फलों का जायका नहीं ले पाते, क्योंकि चीन में इन्हें लग्जरी फ्रूट्स में गिना जाता है, जो बेशकीमती होते हैं. चीन में इन फलों को गिफ्ट करने का काफी चलन है.

ब्लैक डायनमंड एप्पल को उगाने के लिए सही मिट्टी और सही तापमान होना चाहिए. तिब्बत की जमीन ब्लैक डायमंड के उगाने के लिए सबसे अनुकूल है. यहां दिन में सूरज की रौशनी और अल्ट्रावॉयलेट रेज सीधा फलों पर पड़ती है, वहीं रात को तापमान एक दम गिर जाता है, जिसके चलते सेब का रंग काला हो जाता है, हालांकि धूप पड़ने पर ब्लैक डायमंड एप्पल बैंगनी शेड भी ले लेता है.

अंदर ये फल सफेद रंग के ही होते हैं. धूप और बाहरी तापमान का असर अंदरूनी हिस्से पर नहीं पड़ता. इस सेब की क्वालिटी भी दूसरों से काफी अलग होती है. इसका काला रंग और चमक की वजह से ही लोगों ने इसे ब्लैक डायमंड की उपाधि दी है. तिब्बत का सिर्फ यही फल अनोखा नहीं है. वहां उगने वाले फूल और दूसरी प्रजातियां भी रंग-रूप में एकदम अलग होती है.

8 साल में उगते हैं फल

आमतौर पर साधारण सेब के पेड़ से 4 से 5 साल के अंदर फलों का प्रोडक्शन मिल जाता है, लेकिन काले रंग का सेब उगाने में भी बड़ी मशक्कत करनी होती है. पौधों की रोपाई के बाद 8 साल तक पेड़ की देखभाल की जाती है, तब जाकर फलों का प्रोडक्शन मिलता है. एक तरफ हर साल लाल रंग के सेबों का 80 फीसदी उत्पादन मिल जाता है, लेकिन ब्लैक डायमंड एप्पल का पेड़ एक साल में 30 फीसदी ही फल देता है, जो उत्पादन मिलता है, वो भी दूसरे देशों को निर्यात कर दिया जाता है. यही वजह है कि इसकी वैल्यू और कीमत भी काफी ज्यादा है.

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