राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस को दिया तगड़ा झटका

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पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने हाथ का साथ छोड़ दिया है. महरिया आज बीजेपी में शामिल होंगे. महरिया 1999 के चुनाव में सीकर से कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ बलराम जाखड़ को हराकर बीजेपी के आंखों के तारे बन गये.

वह तीन बार सीकर से सांसद रहे हैं. तत्कालीन पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने महरिया को कांग्रेस में लाने में अहम भूमिका निभाई थी. माना जा रहा है कि बीजेपी महरिया को विधानसभा चुनाव में टिकट देगी. चर्चा है कि महरिया पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ चुनाव लड़ सकते है.

आज बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करेंगे

बीजेपी से तीन बार के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया 19 मई को अपने समर्थकों के साथ फिर से भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्री विधानसभा चुनाव से पूर्व एक बार फिर भाजपा में शामिल होकर पार्टी को मजबूत करेंगे. मेहरिया आज 10 बजे प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी ज्वाइन करेंगे. महरिया अक्टूबर 1999 से जनवरी 2003 तक ग्रामीण विकास और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में जनवरी 2003-04 तक उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री मंत्री थे. महरिया भाजपा के टिकट पर 1998 से 2009 तक सीकर से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके है.

बलराम जाखड़ को हराकर सुर्खियों में आए थे

लोकसभा चुनाव में बलराम जाखड़ को हराने के बाद से ही महरिया का स्वर्णिम काल शुरू हुआ और उन्हें केंद्र में राज्य मंत्री के पद से नवाजा गया. उसके बाद लगातार 2004 में भी पार्टी ने महरिया को चुनाव मैदान में उतारा, तो उन्होंने हैट्रिक बनाई लेकिन वह 2009 में महादेव सिंह खंडेला से मात खा गए. 2014 में जब पार्टी ने उनको टिकट से दरकिनार किया, तो वे बगावती तेवरों के साथ चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन सफल नहीं हो पाए.

सचिन पायलट ने कांग्रेस में शामिल कराया था

भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर महरिया ने 2014 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. चुनाव में हार के कुछ समय बाद ही तत्कालीन एआईसीसी के प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत, पीसीसी प्रमुख सचिन पायलट और पूर्व पीसीसी प्रमुख नारायणसिंह ने महरिया को कांग्रेस में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में महरिया को कांग्रेस की तरफ से सांसद का प्रत्याशी बनाया गया था. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से पार्टी ने मेहरिया से किनारा कर लिया लोकसभा चुनाव 1996 में कांग्रेस के डॉ हरिसिंह ने महरिया को पहले चुनाव में हार का मुंह दिखाया था. डॉक्टर हरिसिंह ने बीजेपी के सुभाष महरिया को 38000 मतों से पराजित किया था, लेकिन महरिया ने 2 साल बाद ही 1998 के लोकसभा चुनाव में डॉक्टर हरिसिंह से अपनी हार का बदला ले लिया. इस चुनाव में बीजेपी के महरिया ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ सिंह को 41322 वोटों से हराया. इसके बाद मेहरिया ने 1999 में कांग्रेस के डॉ बलराम जाखड़ को 28173 मतों से हराया. 2004 में सुभाष महरिया ने फिर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह को 54683 मतों से शिकस्त दी थी.

इसलिए पार्टी छोड़ने का लिया फैसला

कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के किसानों का कर्जमाफी और युवाओं की बेरोजगारी दूर करने का वादा किया था. प्रदेश की जनता ने पार्टी नेताओं के वादों पर भरोसा कर वोट दिया. अब ऐसा करने वाला प्रदेश का किसान और युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है. सीकर जिले में कांग्रेस पार्टी के जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा हुई है. इन परिस्थितियों में कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहकर कार्य करना मेरे लिए संभव नहीं है. इसलिए मैं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से त्यागपत्र दे रहा हूं.

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