बैंकिंग क्राइसिस और मंदी की आशंका के चलते सोना पहली बार 60 हजार के पार

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सोने की कीमतों में आज जोरदार तेजी देखने को मिली है. बैंकिंग क्राइसिस और मंदी की आशंका के चलते सोना पहली बार 60 हजार के पार निकल गया. सोना आज करीब 1000 रुपये मजबूत होकर 60455 रुपये तक पहुंच गया था. शेयर बाजारों में गिरावट से भी सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला है. बैंकिंग संकट गहराने से दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट आई है, वहीं मंदी की आश्‍ंका भी गहराने लगी है, जिससे सोने में सेफ हैवन के रूप में खरीदारी देखने को मिली. एक्‍सपर्ट मान रहे हैं कि सोने के लिए माहौल फेवरेबल है, आगे यह 64 हजार की रेंज भी पार कर सकता है. इससे पहले एमसीएक्स पर इसका ऑल टाइम हाई 58,847 रुपये प्रति 10 ग्राम था.

10 हजार से 60 हजार का सफर

5 मई 2006: 10,000 रुपये

6 नवंबर, 2010: 20,000 रुपये

1 जून, 2012: 30,000 रुपये

3 जनवरी, 2020: 40,000 रुपये

22 जुलाई 2020: 50,000 रुपये

20 मार्च, 2023: 60,000 रुपये

64 हजार तक जाएगा सोना

केडिया कमोडिटी के डायरेक्‍टर अजय केडिया का कहना है कि सोने की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण बैंकिंग क्राइसिस है. यूबीएस द्वारा क्रेडिट सूइस बैंक को खरीदने की बात आ रही है, लेकिन इससे एक दम से बैंकिंग क्राइसिस खत्‍म हो जाएगा, ऐसा नहीं होने वाला है. यह कंसर्न अभी बना हुआ है. दूसरा डॉलर इंडेक्‍स में फिरसे गिरावट देखने को मिल रही है. दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट से भी सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला है. फेड रेट हाइक को लेकर भी अनिश्चितता है. असल में अनिश्चितता में सोने का निवेश का सुरक्षित विकल्‍प माना जाता है. आने वाले दिनों में यह 64,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है. केडिया ने अपना टारगेट 62 हजार से बढ़ाकर 64 हजार कर दिया है.

लोबली ज्‍यादातर प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंक अपने कॉर्पस में सोना जोड़कर अपनी होल्डिंग में डाइवर्सिफिकेशन लाने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्य रूप से, यूएस ट्रीजरी को उनकी होल्डिंग का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है. केंद्रीय बैंकों ने कैलेंडर वर्ष 2022 में 1136 टन से अधिक सोना खरीदा, जो किसी भी कैलेंडर वर्ष में सबसे अधिक है. हाल ही में अमेरिकी रिटेल महंगाई में नरमी और यूएस फेड द्वारा नरमी के संकेत के चलते सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई. अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ अमेरिकी बांड यील्‍ड में भी नरमी आने से सोने को सपोर्ट मिला है. वहीं इक्विटी में अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल टेंशन ने भी सेफ हैवन डिमांड बढ़ाई है.

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